An Open Letter of Sitaram Yechuri to Prime Minister of India

#प्रधानमंत्रीकेनामखुलाखत 
#सीताराम_येचुरी 


#Prime Minister's name
# Sitaram_yechuri

To Shri Narendra Modi
Prime Minister of India
South Block, New Delhi

Dear Prime Minister,

🔵 Hope you will be healthy in this drought of Kovid 19 outbreak.
हमने We have considered this year as the year of 150th anniversary of Gandhi ji and the Father of the Nation is coming to our attention at this time.
🔵 He gave us an always useful mantra that "Remember the face of the poorest and weakest man you have seen, and ask from your heart how useful the step you are thinking of taking. Will. Will that bring him any benefit? " There was no glimpse of this mantra in your speech on Kovid-19 today and the steps taken by the government to take action against it.
🔵 We watched your speech announcing the 21-day lockdown.
🔵 We are very disappointed that so far no provision has been made for the poor and needy, who need help immediately to survive in this disaster.
कोई No steps were taken to help the poor migrant laborers who were most troubled by this lockdown. Most of them are stuck without any support, without any food and support. How will they reach safe places? How will one live without money and food? There are also reports of harassment and harassment by the police. They are wandering here and there for their well-being - neither is there any arrangement of transportation for them nor is there any financial help to fulfill their basic needs.
🔴 There are at least 45 crore Indians who earn daily and eat daily. After the lockdown of twenty-one days a large number of work will be stopped - no steps have been announced as to how their lives will be saved. There is no protection of his life, his income, without any assurance he is left in chaos and chaos. This is exactly the opposite of the social distancing that is needed at this moment of fighting the epidemic.
ता We have heard the announcement of your package of 15 thousand crores for health care with great surprise. We often hear in your speeches talk about the $ 5 trillion economy, - $ 5 trillion economy - and rapid progress in economic sectors. If we consider them true and factual, do we have only 15 thousand crores to spend? Just 112 rupees for every countryman? The announcements of a bailout package of Rs 7.78 lakh crore for rich corporates and a tax rebate of Rs 1.76 lakh crore for them, means that we can spend more than this to spend for the health of those in grave danger. Why are you not taxing the super-rich - super rich - to save the lives of the poor?
By the time of this year's annual budget, this global disease was clearly visible. When you reduced the expenditure on health in that budget, then there was a worry. The allocation of large hospitals was reduced and only 0.1% increase was given for AIIMS. The biggest drop was in the National Health Insurance Scheme which was reduced from Rs 156 crore to Rs 29 crore. The allocation of Ayushman Bharat was also kept at Rs 6400 crore instead of increasing it, whereas it should have been increased. The expenditure of the Food Safety and Quality Authority was also reduced from Rs 360 crore to Rs 283.71 crore. The budget for combating infectious diseases was also kept surprisingly unchanged - Rs 2178 crore.
इन Your government's criminal cuts in health expenses made India more vulnerable. India had two and a half months to escape and prepare for Kovid-19, but nothing to buy a large number of inexpensive testing kits, identify and rule out rescue methods, buy masks and arrange ventilators was done. The surprising thing is that till 24 March your government did not even ban the export of these much needed equipment.
🔴 In your speech, you have asked the state governments to give their full attention to health. It seems that you have forgotten that during such a sensitive time the BJP was involved in demolishing the democratically elected government of Madhya Pradesh and what you wanted to do in Parliament was being done on your own.
🔴 The Left-Front Front Government of Kerala and some other opposition-ruled governments have also implemented important economic packages for the badly affected sections, making disease detection, detection and health a priority. Learning from all these steps, learning from their energy, administrative acumen and spirit has remained far away, yet you have not said a word about them all.
🔵 You should pay every Indian due in this difficult time. This means that you should clearly announce financial assistance for the problems of lockdown and immediate steps for investigation, detection and health. If we want to defeat the disaster of this epidemic before it is too late, then both these things are important.
🔵 Kovid - We all stand together to fight 19.
🔵 But your government is telling everything to the citizens, but unfortunately you have not promised your government to protect their lives.
🔴 I request that the life and health of the public

🔵 Kovid - We all stand together to fight 19.

🔵 But your government is telling everything to the citizens, but unfortunately you have not promised your government to protect their lives.

 I request that please do something in the interest of public life and health.



Sitaram Yechury

General Secretary, # CPI_M

प्रति श्री नरेंद्र मोदी 
प्रधानमंत्री भारत सरकार 
साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली 

प्रिय प्रधान मंत्री जी 
🔵   उम्मीद है कोविद 19 के प्रकोप के इस दुस्समय में आप स्वस्थ होंगे। 
🔵   इस वर्ष को हमने गाँधी जी की 150 वीं सालगिरह की वर्ष के रूप में माना है और  इस समय राष्ट्रपिता हमारे ध्यान में आ रहे हैं।   
🔵   उन्होंने हमे हमेशा काम आने वाला एक मन्त्र दिया था कि "जो सबसे गरीब और कमज़ोर आदमी तुमने देखा हो, उसकी शकल याद करो और अपने दिल से पूछो कि जो कदम उठाने का तुम विचार कर रहे हो, वह उस आदमी के लिए कितना उपयोगी होगा । क्या उससे उसे कुछ लाभ पहुंचेगा ?"  कोविद - 19 को लेकर आज आपके भाषण और इसके मुकाबले  के लिए सरकार के कदमों, की जाने वाली कार्यवाहियों में  इस मन्त्र की कोई झलक नहीं दिखाई दी।  
🔵   हमने 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा करने वाले आपके भाषण को देखा। 
🔵   हमें बहुत निराशा हुयी कि अभी तक गरीब और जरूरतमंदों को राहत पहुंचाने  तथा  इस आपदा में बचने के लिए जिन्हे  फ़ौरन मदद की जरूरत है, उनके लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया।
🔴 इस लॉकडाउन से सबसे ज्यादा परेशान होने वाले गरीब प्रवासी मजदूरों की सहायता करने का कोई कदम नहीं उठाया गया।  उनमे से ज्यादातर बिना किसी आसरे, बिना खाने पीने के किसी सहारे के अधबीच मेंअटके हुए हैं।  वे सुरक्षित जगहों तक कैसे पहुंचेंगे ?  बिना पैसे और खाने के वैसे कैसे ज़िंदा रहेंगे ? पुलिस द्वारा उन्हें परेशान और प्रताड़ित करने की भी खबरें आ रही हैं।  वे अपनी सलामती के लिए इधर उधर भटक रहे हैं - ना तो उनके लिए किसी भी तरह के परिवहन की कोई व्यवस्था की गयी है ना ही बुनियादी जरूरतों की पूर्ती के लिए उनकी कोई आर्थिक मदद ही की गयी है।  
🔴 कमसेकम 45 करोड़ हिन्दुस्तानी ऐसे हैं जो रोज कमाते हैं रोज खाते हैं। इक्कीस दिन के लॉकडाउन के बाद बड़ी संख्या में काम बंद हो जायेगा - उनकी जिंदगी कैसे बचेगी  इसके बारे में किसी  कदम की घोषणा नहीं की गयी है।  उनकी जिंदगी ,उनकी आमदनी की कोई  सुरक्षा नहीं है, किसी आश्वासन के बिना उन्हें अफरातफरी और अराजकता में छोड़ दिया गया है। महामारी से लड़ाई के इस पल में जिस सोशल डिस्टैन्सिंग की जरूरत है यह ठीक उसका उलट है ।   
🔴 हमने बड़े ताज्जुब के साथ स्वास्थ्य की देखरेख के लिए 15 हजार करोड़ रुपये के आपके  पैकेज की घोषणा सुनी है. हम अक्सर आपके भाषणों में 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था,- 5 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी  - और आर्थिक क्षेत्रों में तीव्र प्रगति की बातें सुनते रहते हैं।  अगर हम उन्हेंसच्चा और तथ्यपूर्ण माने तो क्या हमारे पास खर्च करने के लिए सिर्फ 15 हजार करोड़ रुपये हैं ? हर देशवासी के लिए सिर्फ 112 रुपये ? रईस कारपोरेटों के लिए 7.78 लाख करोड़ रुपयों के बेलआउट पैकेज और उन्ही को 1.76 लाख करोड़ रुपयों की टैक्स छूट देने की घोषणाओं का मतलब है कि गंभीर खतरे में फंसे लोगों की सेहत के लिए  खर्च करने के लिए  हम इससे ज्यादा खर्च कर सकते हैं। आप गरीबों की जिंदगी बचाने के लिए अति-धनाढ्यों - सुपर रिच - पर टैक्स क्यों नहीं लगा रहे ?
🔴 इस साल के वार्षिक बजट के समय तक यह वैश्विक बीमारी साफ़ दिखाई देने लगी थी।  उस बजट में जब आपने स्वास्थ्य पर होने वाला खर्चा घटाया तभी चिंता होने लगी थी। बड़े अस्पतालों का आवंटन कम कर दिया गया था और एम्स के लिए मात्र 0.1% की वृध्दि दी गयी थी। सबसे बड़ी गिरावट राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में थी जिसे 156 करोड़ रुपये से घटाकर 29 करोड़ रुपये कर दिया गया था।  आयुष्मान भारत का आवंटन भी बजाय बढ़ाने के यथावत 6400 करोड़ रूपये ही रखा गया, जबकि इसे बढ़ाया जाना चाहिए था। खाद्य सुरक्षा एवं गुणवत्ता प्राधिकरण का खर्चा भी 360 करोड़ रूपये से कम करके 283.71 करोड़ रुपये कर दिया गया।  संक्रामक बीमारियों के मुकाबले के लिए रखे गए बजट को भी आश्चर्यजनक रूप से अपरिवर्तनीय - 2178 करोड़ रुपये  - ही रखा।  
🔴 स्वास्थ्य खर्चों में आपकी सरकार की इन आपराधिक कटौतियों ने  भारत को और असुरक्षित बना दिया।  भारत के पास कोविद - 19 से बचने और उससे मुकाबले की तैयारी  के लिए ढाई महीने का समय था मगर अधिक संख्या में सस्ती टैस्टिंग किट्स खरीदने, बचाव के तरीको की पहचान और नियम बनाने , मास्क खरीदने और वेंटिलेटर्स की व्यवस्था करने के लिए कुछ भी नहीं किया गया। आश्चर्य की बात तो यह है कि 24 मार्च तक आपकी सरकार ने इन अत्यंत जरूरी उपकरणों के एक्सपोर्ट पर प्रतिबन्ध तक नहीं लगाया था।   
🔴 आपने अपने भाषण में प्रदेश सरकारों से कहा है कि वे अपना पूरा ध्यान स्वास्थ्य पर दें।  लगता है शायद आप भूल गए कि इतने संवेदनशील समय में भाजपा मध्यप्रदेश की लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गयी सरकार को गिराने में भिड़ी हुयी थी और संसद में आप अपनी मर्जी से जो करना चाह रहे थे वह किया जा रहा था।  
🔴 केरल की वाम-जनवादी मोर्चे की सरकार और कुछ अन्य विपक्ष शासित सरकारों ने बीमारी की जांच करने, पता लगाने तथा स्वास्थ्य को प्राथमिकता पर लेते हुए बुरी तरह प्रभावित तबकों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक पैकेज भी लागू किये। इन सब कदमों से सीखने, उनकी ऊर्जा,  प्रशासनिक कुशाग्रता तथा भावना से सीखना तो दूर रहा  अभी तक इन सबके बारे में आपने एक शब्द भी नहीं कहा। 
🔵   आपको इस मुश्किल समय में हर हिन्दुस्तानी को उसका देय देना चाहिए। इसका मतलब यह है कि आपको लॉकडाउन की परेशानियों के लिए आर्थिक सहायता तथा जांच, पता लगाने और स्वास्थ्य के लिए तत्काल उठाये जाने वाले कदमो की साफ़ साफ़ घोषणा करनी चाहिए।  यदि हम इस ज्यादा देर होने से पहले इस महामारी की आपदा को हराना चाहते हैं तो ये दोनों काम महत्वपूर्ण है।  
🔵   कोविद - 19 से लड़ने के लिए हम सब साथ खड़े है। 
🔵  मगर आपकी सरकार नागरिकों से तो सब कुछ कह रही किन्तु दुर्भाग्य से आपने अपनी सरकार को ओर से उनकी जिंदगी की हिफाजत के लिए कोई वायदा नहीं किया है।  
🔴 मेरा अनुरोध है कि जनता के जीवन और स्वास्थ्य के हित में प्लीज कुछ कीजिये। 
सीताराम येचुरी 
महासचिव, #सीपीआई_एम
(रात 1 बजे के करीब भेजे गए पत्र का अंगरेजी से सरल भावानुवाद)


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