Curfew made fun in the name of Essential Goods

जरूरी सामान के नाम पर मजाक बना दिया कर्फ्यू को
Curfew made fun in the name of Essential Goods
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 This Indore city is truly a spectacle, the atmosphere was seen in the city from 7 am today. It was very bad. Many people live in Rajmohalla and are roaming in Vijay Nagar. On the pretext of buying vegetables and milk, 4 people are coming from a house in a car to buy goods. Parents have also brought their children on scooters. They also rotate it. After all, the question arises that if the district administration has imposed curfew then how will it be followed. The 7-hour curfew has an undeclared exemption. What does this essential stuff mean? Milk and vegetable medicine shops are operational. Grocery items can come from home. Foodservice organizations are reaching the needy people. So many people are involved in the arrangement. It seems that there is no one from home who is not roaming the city. Surplus people are roaming. It does not take more than half an hour to get milk and vegetables around your house, so why are people wandering in the city for five to five hours. Many people have gone out to visit their relatives and friends. The police administration should stop people and ask where do you live. Where are you going to buy goods, are you not getting the same in your area. Every family keeps 15 days of groceries in the routine. People have been buying goods since 5 days, are they buying goods for 1 year. In the routine, every family also takes vegetables for two-three days, so why have they left the house on the pretext of taking vegetables every day. Can not a person of the house bring the same? When I asked all such questions this morning, people used to say that we are imprisoned at home and went out for a bit on this pretext. It was very shocking to hear this. The people of Indore are really slapstick. They are not ready to believe that the district administration should make the time to buy essential goods from 7 to 10 or 11 am instead of 7 to 2 in the morning. needed. There is no point in waiving the 7-hour curfew.
 Now is the time that it is necessary for the administration to see how many people really need the city for help. How many people should be from social institutions. Even the police and administration will have to see that the people who are roaming are not moving from their area to other areas. Everyone should have a letter of introduction. If 4 people are sitting in the car who are walking in the city, then what work are the four going to do? It has to be seen that two people are going on a two-wheeler, so both have to ask what work they are going to do. The district administration needs to be strict, for that first time will have to reduce the time to buy the necessary goods. Milk and vegetables are easily available, so what does it mean to leave the city? When will the people of Indore city improve? Curfew is bent on making fun of them, and on social media issues a lengthy appeal not to leave the house. Unnecessary waste is coming out of the house itself. Teaching people Only the police can do the work to fix such people. In Indore, it is very important to see the effect of the toughness of police. Otherwise the coronavirus will show its effect.
Sorry

 यह इंदौर शहर वाकई तमाशबीनों का है आज सुबह 7 बजे से शहर में जो माहौल देखने को मिला। वह बहुत ही खराब था ।कई लोग रहते राजमोहल्ला में है और विजय नगर में घूम रहे हैं। सब्जी और दूध खरीदने के बहाने एक घर से कार में 4 लोग बैठ कर सामान खरीदने आ रहे हैं। स्कूटर पर माता-पिता अपने बच्चों को भी बिठा कर ले आए है। बोले इसको भी घुमा लाते हैं। आखिर सवाल इस बात का उठता है कि जिला प्रशासन ने यदि कर्फ्यू लगाया है तो उसका पालन कैसे होगा। 7 घंटे की कर्फ्यू में अघोषित छूट हो गई है। यह जरूरी सामान का मतलब आखिर क्या होता है। दूध और सब्जी दवाई की दुकानें चालू है। घर बैठे किराना सामान आ सकता है। जरूरतमंद लोगों तक भोजन समाज सेवी संस्थाएं पहुंचा रही है। इतने सारे लोग इंतजाम में लग गए हैं। लग रहा है कि कोई भी घर से ऐसा व्यक्ति नहीं है जो शहर में घूम नहीं रहा। फालतू लोग घूम रहे हैं। अपने घर के आस-पास दूध और सब्जी लेने जाने में आधे घंटे से ज्यादा का समय नहीं लगता है तो फिर लोग पांच 5 घंटे शहर में क्यों घूम रहे हैं। कई लोग अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से मिलने निकल पड़े हैं। पुलिस प्रशासन को चाहिए कि वह लोगों को रोके और पूछे कि आप कहां रहते हैं। कहां सामान खरीदने जा रहे हैं, क्या आपके इलाके में समान नहीं मिल रहा है। किराने का सामान हर परिवार रूटीन में महीने 15 दिन का तो रखता ही है। 5 दिन से लोग सामान खरीद रहे हैं, क्या 1 साल का सामान खरीद रहे हैं। रूटीन में हर परिवार सब्जी भी दो-तीन दिन की तो ले लेता है तो फिर रोज-रोज सब्जी लेने के बहाने घर से क्यों निकल पड़े हैं। घर का एक व्यक्ति समान नहीं ला सकता है क्या। ऐसे तमाम सवाल आज सुबह मैंने लोगों से पूछे तो लोगों का यह कहना था कि हम घर में कैद हैं थोड़ा सा इस बहाने घूमने भी निकल गए। यह सुनकर काफी धक्का लगा मन दुखी हुआ ।इंदौर के लोग वाकई तमाशबीन हैं यह लोग मानने को तैयार को तैयार नहीं है जिला प्रशासन को चाहिए कि जरूरी सामान खरीदने का समय सुबह 7 से 2 की बजाए सुबह 7 से 10 या 11 बजे तक कर देना चाहिए। कोई मतलब नहीं है 7 घंटे कर्फ्यू में छूट देने का।

 अभी तो समय ऐसा है कि प्रशासन को ही देखना जरूरी है कि कितने लोग वास्तव में मदद के लिए शहर को चाहिए। सामाजिक संस्थाओं के लोग कितने होना चाहिए। यहां तक कि पुलिस और प्रशासन को देखना पड़ेगा कि जो लोग घूम रहे हैं वह अपने इलाके से दूसरे इलाके मैं तो नहीं घूम रहे हैं। सबके पास परिचय पत्र होना चाहिए। जो शहर में घूम रहे हैं कार में यदि 4 लोग बैठे हैं तो चारों किस काम से जा रहे हैं। यह देखना होगा दो पहिया वाहन पर दो लोग जा रहे हैं तो दोनों से पूछना पड़ेगा किस काम से जा रहे हैं। जिला प्रशासन को सख्ती बरतना जरूरी है उसके लिए सबसे पहले जरूरी सामान खरीदने का समय कम करना पड़ेगा। दूध और सब्जी तक आसानी से मिल रही है तो फिर शहर में निकलने का क्या मतलब है। इंदौर शहर के लोग आखिर कब सुधरेंगे। कर्फ्यू को मजाक बनाने पर तुले हैं, और सोशल मीडिया पर लंबी चौड़ी अपील जारी करते हैं कि घर से बाहर नहीं निकले। खुद घर से अनावश्यक फालतू निकल रहे हैं।  लोगों को सीख दे रहे हैं। ऐसे लोगों को ठीक करने का काम पुलिस ही कर सकती है। इंदौर में पुलिस की सख्ती का असर देखना बहुत जरूरी है। नहीं तो कोरोनावायरस अपना असर दिखा देगा।
माफ़ करना 🙏🙏



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