Kamal Kishore's Jewelry Shop

🌼कमल किशोर सोने और हीरे के जवाहरात बनाने और बेचने का काम करता था। उसकी दुकान से बने हुए गहने दूर-दूर तक मशहूर थे ।

Kamal Kishore used to make and sell gold and diamond gems. The jewelry made from his shop was very famous. 

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People used to come and buy jewelry from Kamal Kishore's Shop from other city too. 
Whether it is hand bracelets, necklace, earrings and diamonds. 
Gold would have been a very beautiful enamel that all the watchers would have been able to see. Despite being such a big business, Kamal Kishore was a very calm and simple person. 
He was not so much colored by this maya. One day a friend of his came to his shop who was coming back with his wife through Vrindavan Dham, then he thought that let's give a little prasad to his friend Kamal Kishore too. When he reached his shop, an artisan of Kamal Kishore came to make a very beautiful necklace studded with gold and diamonds and gave it to Kamal Kishore. 

Right now Kamal Kishore was looking at that necklace, then his friend reached his shop. Kamal Kishore's friend had brought with him a very beautiful laddu Gopal from Vrindavan, who was very charming in form when his friend sat at the shop, his lap. Laddu Gopal ji was seated in the place. Kamal Kishore Laddu was very happy to see the beautiful beauty of Gopal ji. 

He put the necklace in his hand in the neck of that laddu Gopal and started telling his friend that the beauty of this necklace has increased by reading it in the neck of Laddu Gopal. So his friend and Kamal Kishore talk among themselves. In the process of talking, his friend Laddoo took Gopal with a necklace. Both of them did not know that Laddoo was lying in the neck of Gopal. Kamal Kishore's friend his wife Along with boarded a taxi and left for his home. When he got down from the taxi, Laddu Gopal ji remained in the same taxi by mistake. 

There was a poor man with a taxi named Babu who used to drive a taxi from another city to take care of his family here and had gone far ahead with a taxi. Today he had to go back to his house which was in another city. When Babu reached his house with a taxi, when he looked at the back seat of his taxi, he turned his attention to Laddu Gopal ji, who in a very royal way, wore a necklace on the back seat. He is sitting in a beautiful dress holding a flute in his hand. 

Babu is very nervous to see who this laddu Gopal ji is but now he has gone from another city to his city which was quite far away and he rides. He did not even know the house, so he was confused about what to do but then he washed his hands with great reverence and picked up Laddoo Gopal ji and took him inside his house as soon as he entered the house. When his wife saw Laddoo Gopal ji in her hand, when she saw Laddoo Gopal ji in such a beautiful shape, his wife quickly took Laddoo Gopal ji from the hands of her husband, his wife, who had been married for 8 years. 
He did not have any children yet. But as soon as Gopal ji was taken in hand, his euphoria was awakened, his Mamatamai and compassionate eyes started flowing. Due to Mamta's control and feeling, she felt as if she was carrying her own child in her lap. She started sucking milk from her breasts on her own. Babu's wife Malati was very surprised to see his condition. Took Gopal ji from his chest and started speaking tears in his eyes, oh Babu, you do not know how much precious jewels you have brought for me today. Babu could not understand what has happened to my wife all of a sudden, but as his wife had become inferior, she quickly took Gopal ji in and started talking to him, oh Lala, you have come from so far. He must have been hungry and he quickly offered Thakur ji by making a chauri made of honey and ghee and heating milk. 

And when Kamal Kishore did not see the necklace at his shop, he remembered that the necklace was Thakur Is left in the throat, then he sent a message to his friend, the friend replied further, Oh friend, he has been stolen himself, including Makhan Chor and Chit Chor Haar, I am so upset myself, Kamal Kishore is now a bit upset Did not know where such a precious defeat went. 

I lost millions but still because of his simple nature he did not say anything to his friend and he thought in his mind that there is nothing Yes, my necklace has become a part of Thakur ji, if my feeling is true, then Thakur ji should keep wearing it and there Babu and his wife Malti would serve Thakur ji day and night. Used to be. With the grace of Laddugopal ji, now a very beautiful daughter was born to Malti. He would give credit for all these things to Laddoo Gopal ji that this is our son and now we have a daughter, now our family is complete. Malti loved Laddoo Gopal ji so much that he used to wake up at night to see that Laddoo Gopal Ji has no problem. One day Kamal Kishore had to come to another city in connection with the business where Babu used to live, but unfortunately, when he reached that city, it rained suddenly. 

It started that Kamal Kishore could not reach where he had to reach. And then Babu came there with his taxi and asked the troubled Kamal Kishore, Babuji, why are you standing here, the rain is not going to stop and the whole city is full of water, you will not be able to reach your destination and stop anywhere else. 

The house is near, if you want, you can come to my house, Kamal Kishore, who has a lot of gold and diamond jewelry






🌼कमल किशोर सोने और हीरे के जवाहरात बनाने और बेचने का काम करता था। उसकी दुकान से बने हुए गहने दूर-दूर तक मशहूर थे ।

लोग दूसरे शहर से भी कमल किशोर की दुकान से गहने लेने और बनवाने आते थे ।चाहे हाथों के कंगन हो ,चाहे गले का हार हो, चाहे कानों के कुंडल हो उसमें  हीरे और सोने की  बहुत सुंदर मीनाकारी होती कि सब देखने वाले देखते ही रह जाते। 

इतना  बड़ा कारोबार होने के बावजूद भी कमल किशोर बहुत ही शांत और सरल स्वभाव वाला व्यक्ति था । उसको इस माया का इतना रंग नहीं चढ़ा हुआ था।एक दिन उसका कोई मित्र उसकी दुकान पर आया जो कि अपने पत्नी सहित वृंदावन धाम से होकर वापस आ रहा था तो उस मित्र ने सोचा कि चलो थोड़ा सा प्रसाद अपने मित्र कमल किशोर को भी देता चले ।

उसकी दुकान पर जब वह पहुंचा तभी कमल किशोर का एक कारीगर एक सोने और हीरे जड़ित बहुत सुंदर हार बना कर कमल किशोर को देने के लिए आया। अभी कमल किशोर उस हार को देख ही रहा था तभी उसका मित्र उसकी दुकान पर पहुंच गया ।कमल किशोर का मित्र अपने साथ वृंदावन से एक बहुत सुंदर लड्डू गोपाल जिसका सवरूप अत्यंत मनमोहक था साथ लेकर आया था जब उसका मित्र दुकान पर बैठा तो उसकी गोद में लड्डू गोपाल जी विराजमान थे ।

कमल किशोर लड्डू गोपाल जी  के मनमोहक रुप सोन्दर्य को देखकर अत्यंत  आंनदित हुआ। उसने अपने हाथ में पकड़ा हुआ हार उस लड्डू गोपाल के गले में पहना दिया और अपने मित्र को कहने लगा कि देखो तो सही इस हार की शोभा लड्डू गोपाल के गले में पढ़ने से कितनी बढ़ गई है ।तो उसका मित्र और कमल किशोर आपस में बातें करने लगे बातों बातों में ही उसका मित्र लड्डू गोपाल को हार सहित लेकर चला गया ।
दोनों को ही पता ना चला कि हार लड्डू गोपाल के गले में ही पड़ा रह गया है ।कमल किशोर का मित्र अपनी पत्नी सहित एक टैक्सी में सवार होकर अपने घर को रवाना हो गए। जब वह टैक्सी से उतरे तो भूलवश लड्डू गोपाल  जी उसी टैक्सी में रह गए। टैक्सी वाला एक गरीब आदमी था  जिसका नाम बाबू था जो कि दूसरे शहर से यहां अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिए टैक्सी चलाता था और वह टैक्सी लेकर काफी आगे निकल चुका था ।आज उसको अपने घर वापस जाना था जो कि दूसरे शहर में था ।

जब  टैक्सी लेकर बाबू अपने घर पहुंचा तो उसने जब अपनी टैक्सी की  पिछली सीट पर देखा तो उसका ध्यान लड्डू गोपाल जी पर पड़ा जो के बड़े शाही तरीके से पिछली सीट पर गले में हार धारण करके सुंदर सी पोशाक पहनकर हाथ में बांसुरी पकड़े हुए पसर कर बैठे हुए हैं ।बाबू यह देखकर एकदम से घबरा गया कि यह लड्डू गोपाल जी किसके हैं लेकिन अब वह दूसरे शहर से अपने शहर जा चुका था जो कि काफी दूर था और वह सवारी का घर भी नहीं जानता था तो वह दुविधा में पड़ गया कि वह क्या करें लेकिन फिर उसने बड़ी श्रद्धा से हाथ धो कर लड्डू गोपाल जी को उठाया और अपने घर के अंदर ले गया जैसे ही उसने घर के अंदर प्रवेश किया उसकी पत्नी ने उसके हाथ में पकड़े लड्डू गोपाल जी को जब देखा को इतनी सुंदर स्वरूप वाले लड्डू गोपाल जी को देखकर उसकी पत्नी ने झट से लड्डू गोपाल जी को अपने पति के हाथों से ले लिया उसकी पत्नी जिसकी 8 साल शादी को  हो चुके थे  उसके अभी तक कोई संतान नहीं थी ।

लेकिन गोपाल जी को हाथ में लेते ही उसका वात्सालय भाव जाग उठा उसकी ममतामई और करुणामई आंखें झर झर बहने लगी। ममता वश और वात्सल्य भाव के कारण ठाकुर जी को गोद में उठाते ही उसको ऐसे लगा उसने किसी अपने ही बच्चे को गोद में उठाया है उसके स्तनों से अपने आप ही दूध निकलने लगा ।अपनी ऐसी दशा देखकर बाबू की पत्नी मालती बहुत हैरान हुए उसने  कसकर गोपाल जी को अपने सीने से लगा लिया और आंखों में आंसू बहाती बोलने लगी अरे बाबू तुम नहीं जानते कि आज तुम   मेरे लिए कितना अमूल्य रत्न   लेकर आए हो। 

बाबू कुछ समझ नहीं पा रहा था कि मेरी पत्नी को अचानक से क्या हो गया है लेकिन उसकी पत्नी तो जैसे बांवरी सी हो गई थी वह गोपाल जी को जल्दी-जल्दी अंदर ले गई और उससे बातें करने लगी अरे लाला इतनी दूर से आए हो तुम्हें भूख लगी होगी और उसने जल्दी जल्दी मधु और घी से बनी चूरी बनाकर और दूध गर्म करके ठाकुर जी को भोग लगाया ।और उधर कमल किशोर ने जब अपनी दुकान पर हार को ना देखा तो उसको याद आया कि हार तो ठाकुर जी के गले में ही रह गया है तो उसने अपने मित्र को संदेशा भेजा तो मित्र ने आगे से जवाब दिया अरे मित्र वह  माखन चोर और चित् चोर  हार सहित खुद ही चोरी हो गया है मैं तो खुद इतना परेशान हूं कमल किशोर अब थोड़ा सा परेशान हो गया  कि ईतना कीमती हार ना जाने कहां चला गया ।मुझे तो लाखों का नुकसान हो गया लेकिन फिर भी अपने सरल स्वभाव के कारण उसने अपने मित्र को कुछ नहीं कहा और उसने अपने मन में सोचा कि कोई बात नहीं मेरा हार तो ठाकुर जी के ही अंग लगा है अगर मेरी भावना सच्ची है तो ठाकुर जी उसको पहनी रखें और उधर बाबू और उसकी पत्नी मालती दिन-रात ठाकुर जी की सेवा करते अब तो मालती और बाबू को लड्डू गोपाल जी अपने बेटे जैसे ही लगते। 

लड्डूगोपाल जी की कृपा से अब मालती के घर एक बहुत ही सुंदर बेटी ने जन्म लिया । इन सब बातों का श्रेय वह लड्डू गोपाल जी को देते कि  यह हमारा बेटा है और अब हमारी बेटी हुई है अब हमारा परिवार पूरा हो गया ।मालती लड्डू गोपाल जी को इतना स्नेह करती थी कि रात को उठ उठ कर  देखने जाती थी कि लड्डू गोपाल जी को कोई कष्ट तो नहीं है ऐसे ही एक दिन कमल किशोर को व्यापार के सिलसिले में दूसरे शहर आना पड़ा जहां पर बाबू रहता था लेकिन दुर्भाग्यवश जब वो उस शहर में पहुंचा तो अचानक से इतनी बारिश शुरू हो गई कि कमल किशोर को जहां पहुंचना था वहां पहुंच ना सका। 

और तभी वहां बाबू अपनी टैक्सी लेकर आ गया और उसने परेशान कमल किशोर को पूछा बाबूजी आप यहां क्यों खड़े हो बारिश तो रुकने वाली नहीं और सारे शहर में पानी भरा हुआ है आप अपनी मंजिल तक ना पहुंच पाओगे और ना ही कहीं और रुक पाओगे मेरा घर पास ही है अगर आप चाहो तो मेरे घर आ सकते हो कमल किशोर जिसके पास सोने और हीरे के काफी गहने थे वह   अनजान टैक्सी वाले के साथ जाने के लिए थोड़ा सा घबरा रहा था। लेकिन उसके पास और कोई चारा नहीं था और वह बाबू के घर उसके साथ टैक्सी में बैठ कर चला गया। घर पहुंचते ही बाबू ने मालती को आवाज दी कि आज हमारे घर मेहमान आए हैं उनके लिए खाना बनाओ। कमल किशोर ने देखा कि बाबू का घर एक बहुत छोटा सा लेकिन व्यवस्थित ढंग से सजा हुआ है घर में अजीब तरह के इत्र की खुशबू आ रही है जो कि उसके  हृदय को आनंदित कर रही थी ।


जब मालती ने उनको भोजन परोसा तो  कमल किशोर को उसमें अमृत जैसा स्वाद आया उसका ध्यान बार-बार उस दिशा की तरफ जा रहा था जहां पर ठाकुर जी विराजमान थे वहां से उसको एक अजीब तरह का प्रकाश नजर आ रहा था तो हार कर कमल किशोर ने बाबू को पूछा कि अगर आपको कोई एतराज ना हो तो क्या आप बता सकते हो कि उस दिशा में क्या रखा है मेरा ध्यान उसकी तरफ आकर्षित हो रहा है तो बाबू और मालती ने एक दूसरे की तरफ मुस्कुराते हुए कहा कि वहां पर तो हमारे घर के सबसे अहम सदस्य  लड्डू गोपाल जी विराजमान है। 

तो कमल किशोर ने कहा क्या मैं उनके दर्शन कर सकता हूं तो मालती उनको उस कोने में ले गई जहां पर लड्डू गोपाल जी विराजमान थे। कमल किशोर लड्डू गोपाल जी को और उनके गले में पड़े हार को देखकर एकदम से हैरान हो गया यह तो वही लड्डू गोपाल है और यह वही हार है जो मैंने अपने मित्र के लड्डू गोपाल जी को डाला था तो कमल किशोर ने बड़ी विनम्रता से पूछा कि यह  गोपाल जी तुम कहां से लाए हो बाबू जिसके मन में कोई  छल कपट नहीं था उसने कमल किशोर को  सारी बात बता दी  कि कैसे उसको  सोभाग्य से गोपाल जी मिले और उनके हमारे घर आने से हमारा दुर्भाग्य सौभाग्य में बदल गया।

तो कमल किशोर ने कहा क्या तुम जानते हो कि जो हार ठाकुर जी के गले में पड़ा है उसकी कीमत क्या है तो बाबू और मालती ने बड़ी विनम्रता से हाथ जोड़कर कहा कि जो चीज हमारे लड्डू गोपाल जी के अंग लग गई हम उसका मूल्य नहीं जानना चाहते और हमारे लाला के सामने
 किसी चीज  किसी हार का कोई मोल नहीं है तो कमल किशोर एकदम से चुप हो गया और उसने मन में सोचा कि चलो अच्छा है मेरा हार ठाकुर जी ने अपने अंग लगाया हुआ है अगले दिन जब वह चलने को तैयार हुआ और बाबू उनको टैक्सी में लेकर उनके मंजिल तक पहुंचाने गया जब कमल किशोर टैक्सी से उतरा और जाने लगा तभी बाबू ने उनको आवाज लगाई की जरा रुको यह आपका कोई सामान हमारी टैक्सी में रह गया है लेकिन कमल किशोर ने कहा मैंने तो वहां कुछ नहीं रखा लेकिन बाबू ने कहा कि यह बैग तो आपका ही है जब कमल किशोर ने उसको खोलकर देखा तो उसमें बहुत सारे पैसे थे कमल किशोर एकदम से हक्का-बक्का रह गया कि यह तो इतने पैसे हैं जितनी कि उस हार की कीमत है उसकी आंखों में आंसू आ गए कि जब तक मैंने  निश्छल भाव से ठाकुर जी को वह हार धारण करवाया हुआ था तब तक उन्होंने पहने  रखा मैंने उनको पैसों का सुनाया तो उन्होंने मेरा  अभिमान तोड़ने के लिए पैसे मुझे दे दिए हैं। वह ठाकुर जी से क्षमा मांगने लगा लेकिन अब हो भी क्या सकता था ।

इसलिए हमारे अंदर ऐसे भाव होने चाहिए कि
उसमें अहंकार न होकर विनम्रता होनी चाहिए और  ठाकुर जी जैसा चाहते हैं वैसा ही होता है हम तो निमित्त मात्र हैं कौन ठाकुर जी को वृंदावन से लाया और किसके घर आकर वह विराजमान हुए यह सब ठाकुर जी की लीला है जिसके घर रहना है जिसके घर सेवा लेनी है यह सभी जानते हैं हम लोग तो निमित्त मात्र हैं बस हमारे भाव शुद्ध होनेचाहिए ।

ठाकुर जी तो बड़े बड़े पकवान नहीं बल्कि भाव से खिलाई छोटी से छोटी चीज को भी ग्रहण कर लेते हैं।🍁👏🙇‍♂





आने वाला कल
जब आपके बच्चे आपसे सवाल पूछेंगे
तुम क्या कर रहे थे
जब बीजेपी हमारे राष्ट्र को बिगाड़ और बेच रही थी
और हमारे राष्ट्र को अडानी और अंबानी को बेच रही थी
आपका जवाब क्या होगा?
उत्तर: हम एक बाघ के रूप में एक दाग को साबित करने की कोशिश कर रहे हैं

Tomorrow
When your children will Ask you questions
What were you doing
When BJP was spoiling and selling our nation
And selling   our nation  to Adani and Ambani 

What would be your answer ?

Answer : We are trying to Proove a Dag As a Tiger 
आने वाला कल
जब आपके बच्चे आपसे सवाल पूछेंगे
आप क्या कर रहे थे
जब बीजेपी हमारे राष्ट्र को बिगाड़ और बेच रही थी
और हमारे राष्ट्र को अडानी और अंबानी का बेच रही थी 

आपका जवाब क्या होगा?


Tommorow
When Your Kids Will Ask You Question
What were you Doing
When BJP was Spoiling and Selling our Nation
And Promoting Only Adani and Ambani

What will be your Answer ? 


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