Indian Police

एक बार एक दरोगा जी का मुंह लगा नाई पूछ बैठा -

"हुजूर पुलिस वाले रस्सी का साँप कैसे बना देते हैं ?"

https://www.anxietyattak.com/2019/07/indian-police.html

दरोगा जी बात को टाल गए।

लेकिन नाई ने जब दो-तीन
बार यही सवाल पूछा तो दरोगा जी ने मन ही मन तय किया कि इस भूतनी वाले को बताना ही पड़ेगा कि रस्सी का साँप कैसे बनाते हैं !

लेकिन प्रत्यक्ष में नाई से बोले - "अगली बार आऊंगा तब
बताऊंगा !"

इधर दरोगा जी के जाने के दो घंटे बाद ही 4 सिपाही नाई
की दुकान पर छापा मारने आ धमके - "मुखबिर से पक्की खबर मिली है, तू हथियार सप्लाई करता है। तलाशी लेनी है दूकान की !"

तलाशी शुरू हुई ...

एक सिपाही ने नजर बचाकर हड़प्पा की खुदाई से निकला जंग लगा हुआ असलहा छुपा दिया !

दूकान का सामान उलटने-पलटने के बाद एक सिपाही चिल्लाया - "ये रहा रिवाल्वर"

छापामारी अभियान की सफलता देख के नाई के होश उड़ गए - "अरे साहब मैं इसके बारे में कुछ नहीं जानता ।

आपके बड़े साहब भी मुझे अच्छी तरह पहचानते हैं !"

एक सिपाही हड़काते हुए बोला - "दरोगा जी का नाम लेकर बचना चाहता है ? साले सब कुछ बता दे कि तेरे गैंग में कौन-कौन है ... तेरा सरदार कौन है ... तूने कहाँ-कहाँ हथियार सप्लाई किये ... कितनी जगह लूट-पाट की ...
तू अभी थाने चल !"

थाने में दरोगा साहेब को देखते ही नाई पैरों में गिर पड़ा - "साहब बचा लो ... मैंने कुछ नहीं किया !"

दरोगा ने नाई की तरफ देखा और फिर सिपाहियों से पूछा - "क्या हुआ ?"

सिपाही ने वही जंग लगा असलहा दरोगा के सामने पेश कर दिया - "सर जी मुखबिर से पता चला था .. इसका गैंग है और हथियार सप्लाई करता है.. इसकी दूकान से ही ये रिवाल्वर मिली है !"

दरोगा सिपाही से - "तुम जाओ मैं पूछ-ताछ करता हूँ !"

सिपाही के जाते ही दरोगा हमदर्दी से बोले - "ये क्या किया तूने ?"

नाई घिघियाया - "सरकार मुझे बचा लो ... !"

दरोगा गंभीरता से बोला - "देख ये जो सिपाही हैं न ...साले एक नंबर के कमीने हैं ...मैंने अगर तुझे छोड़ दिया तो ये साले मेरी शिकायत ऊपर अफसर से कर देंगे ...
इन कमीनो के मुंह में हड्डी डालनी ही पड़ेगी ...
मैं तुझे अपनी गारंटी पर दो घंटे का समय देता हूँ , जाकर किसी तरह बीस हजार का इंतजाम कर ..
पांच - पांच हजार चारों सिपाहियों को दे दूंगा तो साले मान जायेंगे !"

नाई रोता हुआ बोला - "हुजूर मैं गरीब आदमी बीस हजार कहाँ से लाऊंगा ?"

दरोगा डांटते हुए बोला - "तू मेरा अपना है इसलिए इतना सब कर रहा हूँ तेरी जगह कोई और होता तो तू अब तक जेल पहुँच गया होता ...जल्दी कर वरना बाद में मैं कोई मदद नहीं कर पाऊंगा !"

नाई रोता - कलपता घर गया ... अम्मा के कुछ चांदी के जेवर थे ...चौक में एक ज्वैलर्स के यहाँ सारे जेवर बेचकर किसी तरह बीस हजार लेकर थाने में पहुंचा और सहमते हुए बीस हजार रुपये दरोगा जी को थमा दिए !

दरोजा जी ने रुपयों को संभालते हुए पूछा - "कहाँ से लाया ये रुपया?"

नाई ने ज्वैलर्स के यहाँ जेवर बेचने की बात बतायी तो दरोगा जी ने सिपाही से कहा - "जीप निकाल और नाई को हथकड़ी लगा के जीप में बैठा ले .. दबिश पे चलना है !"

पुलिस की जीप चौक में उसी ज्वैलर्स के यहाँ रुकी !

दरोगा और दो सिपाही ज्वैलर्स की दूकान के अन्दर पहुंचे ...

दरोगा ने पहुँचते ही ज्वैलर्स को रुआब में ले लिया - "चोरी का माल खरीदने का धंधा कब से कर रहे हो ?"

ज्वैलर्स सिटपिटाया - "नहीं दरोगा जी आपको किसी ने गलत जानकारी दी है!"
दरोगा ने डपटते हुए कहा - "चुप ~ बाहर देख जीप में
हथकड़ी लगाए शातिर चोर बैठा है ... कई साल से पुलिस को इसकी तलाश थी ... इसने तेरे यहाँ जेवर बेचा है कि नहीं ? तू तो जेल जाएगा ही .. साथ ही दूकान का सारा माल भी जब्त होगा !"

ज्वैलर्स ने जैसे ही बाहर पुलिस जीप में हथकड़ी पहले नाई को देखा तो उसके होश उड़ गए,

तुरंत हाथ जोड़ लिए - "दरोगा जी जरा मेरी बात सुन लीजिये!

कोने में ले जाकर मामला एक लाख में सेटल हुआ !

दरोगा ने एक लाख की गड्डी जेब में डाली और नाई ने जो गहने बेचे थे वो हासिल किये फिर ज्वैलर्स को वार्निंग दी - "तुम शरीफ आदमी हो और तुम्हारे खिलाफ पहला मामला था इसलिए छोड़ रहा हूँ ... आगे कोई शिकायत न मिले !"

इतना कहकर दरोगा जी और सिपाही जीप पर बैठ के
रवाना हो गए !

थाने में दरोगा जी मुस्कुराते हुए पूछ रहे थे - "साले तेरे को समझ में आया रस्सी का सांप कैसे बनाते हैं !"

नाई सिर नवाते हुए बोला - "हाँ माई-बाप समझ गया !"

दरोगा हँसते हुए बोला - "भूतनी के ले संभाल अपनी अम्मा के गहने और एक हजार रुपया और जाते-जाते याद कर ले ...
हम रस्सी का सांप ही नहीं बल्कि नेवला .. अजगर ... मगरमच्छ सब बनाते हैं .. बस असामी बढ़िया होना चाहिए"।
 ................हमारे देश का कटु सत्य








Once upon a time I asked a daroga ji,

"How do the hujur police make a snake of a rope?"

Drooga avoided the talk

But when hairdresser two-three
Once asked this question, Droji ji decided to mind that the ghost had to tell how to make a snake's rope!

But speaking directly to the barber - "next time I will come
will tell !"

Only two hours after the departure of Dardoga Ji, 4 soldiers hairdresser
Arrested to raid the shop - "Confirmation has been received from the informant, you supply weapons, search the shop!"

The search started ...

A soldier hid the sight and hid from the excavation of Harappa.

A soldier shouted after the goods of the shop reversed - "Here is revolver"

Seeing the success of the raid campaign, the sensation of the barber flashed - "Hey Sir, I do not know anything about it.

Your great sibling also knows me well! "

A soldier blasted saying - "Do you want to save the name of Durga Jee? Let us tell you who is in your gang ... Who is your Sardar ... Where have you supplied arms ... how much Plunder of the place ...
You just move to the police station! "

At the police station, after seeing Daraoga Saheb, the barber fell into the feet - "Save the sir ... I have not done anything!"

Daroga looked at the barber and then asked the soldiers - "What happened?"

The soldier presented the same riot in front of Asalah Drooga - "Sir ji was informed by informer ... it is a gang and it supplies the weapon ... it has got revolver from its shop!"

From Dago Sepahi - "You go, I ask you!"

As soon as the sepoy leaves, he says with sympathy - "What did you do?"

Hairdresser - "Save me the government ...!"

Doorga said seriously - "See these soldiers who are not ... They are a number of bastards ... If I leave you then this fuckin 'will make my complaint to the officer ...
These bastards will have to bone in the mouth ...
I give you two hours on your guarantee, go and arrange twenty thousand in some way ..
I will give five to five thousand four hundred soldiers, then I will accept it! "

The hairdresser said crying - "Where will I bring twenty thousand from the poor man?"

Dorga said scolding - "You are my own, I am doing all this because if someone else was your place then you would have reached the jail till now ... or later I will not be able to help anybody!"

Barber cries - Kalpata went home ... Amma had some silver jewelery ... By selling all the jewels here in a square of jewelers, somehow reached twenty thousand in the police station and agreed to give twenty thousand rupees to Durga ji!

Daroji asked the handling of rupees - "Where did these rupees come from?"

Barber told the jewelers to sell jewelry here, then Drooge said to the soldier - "Take out the jeep and take the hairdresser in the jeep of handcuffing. Dabish has to walk!"

Jeep Chowk of the police stayed here at the same jewelers!

Daraoga and two soldier jewelers arrived inside the shop ...

Druga reached the jewelers as soon as he reached - "How are you doing business to buy stolen goods?"

Jewelers Situptaya - "Do not let anyone know you wrong!"
Dorga said while dumping - "quietly looking out in the jeep
A handcuffed vicious thief is seated ... For many years the police had been looking for it ... did you sell the yarn here or not? You will go to jail ... as well as all the goods in the shop will be seized! "

As soon as the jawlers saw the barbershop before the police jeep in the jeep, then the senses went away,

Immediately to add a hand - "Do not worry, listen to me!

The case settled in the corner, settled in one lakh!

Dorga got one lakh pocket in the pocket and got the jewels which he had sold, and then warned the jewelers - "You are a man and you have been the first case against me, so leave ... no further complaint!"

By saying so, Dagoji and the soldier sitting on the jeep
Gone!

In the police station, Drooga was smiling, asking, "How do you make a snake of the rope that you understand?"

Barber head nodded - "Yes my father understood!"

Dorga said laughing - "Take away the ghosts and remember your Amma's jewels and one thousand rupees and go ...
We are not only the snake of the rope, but the beans ... the dragon ... the crocodile makes all .. Just the best should be good ".
 ................ The bitter truth of our country


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