Shivas disrespect is to walk on the prime ministers red carpet

शिव का अनादर है प्रधानमंत्री का लाल कालीन पर चलकर उन तक जाना 

Shiva's disrespect is to walk on the prime minister's red carpet

Everything looks like a drama The whole drama is based on the fact that people are stupid. Show him a movie made on a king or do something like that the public should think that he is watching a king. Prime Minister Narendra Modi has gone to Kedarnath. The entire journey has been changed to a set so that continuous coverage of news channels can occur. The innocent people of India can be told that religious leaders are traveling away from power and Aishwarya like any other devotee. But happening is exactly the opposite.

Those who believe in God, only tell that they are all equal in his court. We have seen this. Large leaders already went ahead in the temple by breaking the line, but in the same way they looked ordinary for worship. It has never happened that there is a red carpet for any ordinary devotee who went to visit Kedarnath. Their vibes are telling that devotion is also the acting of a TV serial. The Prime Minister is acting in the name of devotion.

News channels have ruined the democracy and democracy of this country. The executive editor does not go out of the studio for the common people. People in Odisha are struggling with catastrophe, there is no channel. But to emphasize the drama of Kedarnath's cover, it is being said that our executive editor is present on the spot.

This space should be privatized by the Prime Minister. But they know that voting is going to happen. Being with them, the accustomed media of their slavery will constantly make programs on Shiva. Brahma will sing lotus qualities The priest has nothing to say. The prime minister is looking serious in the camera. The priest is saying that as a daughter is happy to come in the maiden, the Kedar is happy to come for the fourth time. Modi is acting in front of the camera to review development works. Their every activity is being presented as news. Although the law could not remove any prescription, but the censure of ethics says that the prime minister has overstepped the drama.

There is a rebellion in the Election Commission. This is a very serious news. An Election Commissioner has alleged that the organization is not working according to the rules. News channels are showing Kedarnath's coverage. The Prime Minister has taken all the cameras with him to Kedarnath.

The way to reach Shiva is through the red carpet. In Benares, Prime Minister Vishwanath Dham went to the Corridor's launch. Where he said that Baba was also free today. Now they will also breathe in the open air. Prime Minister Modi can only promise to liberate Baba Vishwanath, who liberates the whole world. Kashi's scholars were also irritated by the fact that Kashi is the place of liberation. Who is Narendra Modi, who announced to give him freedom? It seems that the whole country is sitting silent for a person's hobby. Correcting marks on every wrong. This is a strange sight. Shiva's disrespect is visible.

The devotees of Shiva walk barefoot hundreds of kilometers into burning sunlight. This is also a way of devotion of Shiva. To influence the voting, go on the red carpet and get to the naïve. On this innocence of the people, Prime Minister is giving his victory as a favor. Keeping themselves in the frame of avatar all the time are turning public life into serial. Bum Bum Bhole.



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शिव का अनादर है प्रधानमंत्री का लाल कालीन पर चलकर उन तक जाना 

सब कुछ ड्रामा जैसा लगता है। सारा ड्रामा इस यक़ीन पर आधारित है कि जनता मूर्ख है। उसे किसी बादशाह पर बनी फिल्म दिखाओ या ऐसा कुछ करो कि जनता को लगे कि वह किसी बादशाह को देख रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केदारनाथ गए हैं। पूरी यात्रा को एक सेट में बदल दिया गया है ताकि न्यूज़ चैनलों पर लगातार कवरेज़ हो सके। भारत की भोली जनता को बताया जा सके कि सत्ता और ऐश्वर्य से दूर कोई आम भक्त की तरह धार्मिक यात्रा कर रहा है। मगर हो रहा है ठीक उलट।

जो लोग ईश्वर को मानते हैं, वो यही बताते हैं कि उसके दरबार में सब बराबर हैं। हमने यही देखा है। बड़े बड़े नेता पहले ही लाइन तोड़ कर मंदिर में आगे चले गए मगर पूजा के लिए उसी तरह साधारण नज़र आए। ऐसा कभी नहीं हुआ कि केदारनाथ के दर्शन के लिए जाते किसी साधारण भक्त के लिए लाल कालीन बिछी है। उनके लिबास बता रहे हैं कि भक्ति भी किसी टीवी सीरीयल का अभिनय है। प्रधानमंत्री भक्ति के नाम पर अभिनय कर रहे हैं।

न्यूज़ चैनलों ने इस देश के लोकतंत्र और मर्यादा को बर्बाद कर दिया है। आम लोगों की तकलीफ के लिए कार्यकारी संपादक स्टुडियो से बाहर नहीं जाते। ओडिशा में लोग तबाही से जूझ रहे हैं वहां कोई चैनल नहीं है। मगर केदारनाथ के ड्रामे को कवर करने के लिए ज़ोर देकर बताया जा रहा है कि हमारे कार्यकारी संपादक मौके पर मौजूद हैं।

क़ायदे से प्रधानमंत्री का यह स्पेस प्राइवेट होना चाहिए। मगर उन्हें पता है कि मतदान होना है। उनके होने से उनकी गुलामी का आदी हो चुका मीडिया लगातार शिव पर कार्यक्रम बनाएगा। ब्रह्म कमल के गुण गाएगा। पुजारी के पास बोलने के लिए कुछ नहीं है। कैमरे में प्रधानमंत्री गंभीर दिख रहे हैं। पुजारी बता रहे हैं कि जैसे मायके में बेटी आकर खुश होती है वैसे चौथी बार केदार आकर खुश हैं। कैमरे के सामने मोदी विकास कार्यों की समीक्षा का अभिनय कर रहे हैं। उनकी हर गतिविधि को ख़बर के तौर पर पेश किया जा रहा है। कानून भले ही कोई नुस्ख न निकाल पाए मगर नैतिकता का तकाज़ा कहता है कि प्रधानमंत्री ने ड्रामा का अति कर दिया है।

चुनाव आयोग में बग़ावत है। यह बेहद गंभीर ख़बर है। एक चुनाव आयुक्त ने आयोग पर आरोप लगाया है कि यह संस्था नियमों के हिसाब से काम नहीं कर रही है। न्यूज़ चैनल केदारनाथ का कवरेज दिखा रहे हैं। प्रधानमंत्री अपने साथ सारे कैमरे केदारनाथ ले गए हैं।

शिव तक पहुंचने का रास्ता लाल कालीन से होकर जा रहा है। बनारस में प्रधानमंत्री विश्वनाथ धाम कोरिडोर के लांच में गए थे। जहां उन्होंने कहा कि आज बाबा भी मुक्त हुए। अब वो भी खुली हवा में सांस लेंगे। जो बाबा विश्वनाथ पूरी दुनिया को मुक्ति देते हैं, उन्हें मुक्ति देने का एलान प्रधानमंत्री मोदी ही कर सकते हैं। काशी के विद्वान इस बात से चिढ़ भी गए कि काशी तो मुक्ति की जगह है। उसे मुक्ति देने का एलान करने वाले नरेंद्र मोदी कौन हैं। ऐसा लगता है कि सारा देश एक व्यक्ति के शौक के लिए मौन धारण किए बैठा है। हर ग़लत पर सही के निशान लगा रहा है। यह अजीब दृश्य है। शिव के अनादर का दृश्य है।

शिव के भक्त तो जलती धूप में नंगे पांव सैंकड़ों किमी चले जाते हैं। यह भी शिव की भक्ति का एक तरीका है। मतदान को प्रभावित करने के लिए लाल कालीन पर चल कर भोले तक पहुंचा जाए। जनता की इस मासूमियत  पर प्रधानमंत्री अपनी जीत अहसान की तरह न्यौछावर कर रहे हैं। हर समय ख़ुद को अवतार के फ्रेम में रखकर सार्वजनिक जीवन को सीरीयल में बदल रहे हैं। बम बम भोले।


























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