Friend

किसी रोज़ फिर बाँध लिया था तूने मझे ऐसी डोर से 
में तोह बिखरा हुआ था मोतियों की तरह ,
तूने मझे समेट लिया हर एक कोने हर छोर से ..

वो तेरे पिरोने का तरीका ही अलग था ,
जिस तरह तूने बाँधा वो सरीखा ही अलग था ..
वक़्त के साथ हर धागा कमज़ोर पड़  जाता है ,
हाँ यह सच है , पर 
एक सच्चा दोस्त मरते दम तक साथ निभाता है ..

मझे मेरी ताकतों से मिलाकर ,
तूने मेरी ज़िन्दगी का मुख मोड़ा था ..
मेरे जीवन के फीके रंगों को ,
एक तस्वीर की तरह जोड़ा था ..
ख्वाबों से तकदीर बनाने निकला था मैं,
तूने ज़िन्दगी की असलियत दिखाकर ,
मेरी आँखों को खोला था ..
हाँ ये सच है ,
मेरे दोस्त ने मेरा साथ कभी नहीं छोड़ा था ..


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