Dosti

में सोच रहा था तम्हारे बारे में ,जब हम मिले थे याद है ? 
देखकर नज़रें चुरा रहे थे , क्या  वो चेहरा याद है ?

शुरू हुआ वो सफर परिभाषाएं बदलती गयीं ,
जो दूरियां थी , मोम की तरह पिघलती गयीं |
आये थे दो अलग किनारों से ,
अलग देशों से ,अलग नज़ारों से ..
जब बातें शुरू हुई तो महफ़िलें जमती गयीं ...
शुरू हुयी फिर हमारी दोस्ती ,क्या वो माहौल  याद है ? 

कोहिनूर की तरह चमकने लगी हमारी यारी ,
हमारे आपसी सम्बन्ध पड़े सब पर भारी 
जब वो नाता जुड़ा , तो बढ़ गयीं थी ज़िम्मेदारी 
फिर साथ कदम बढ़ाये , तो मंज़िलें मिलती गयीं ..
सुन्दर गुलाब की तरह , दोस्ती की कलियाँ खिलती गयीं .

जो कसमें खायीं थी , आज भी मुझे याद है ,
मुशीबत में फंस जाने पर दोस्त तेरी ही फ़रियाद है .
वो दोस्ती का मिज़ाज आज भी मुझे याद है ,
जब हम मिले  थे  , क्या वो तारीख तुझे याद  है ?









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