The disciple is the reflection of the master.

Osho 12 days were in the US prisons .. No basis nor warrant nor proof ... nothing but President Ronald Reagan sent them to jail.

And said that we will put you in the form of trials without any evidence and say that you have violated the US law by bringing your disciples abroad from the country without the visa.

To prove to you that you will be innocent, it will take 10 years and by then your commune will be destroyed without you or we will destroy it .. And then we will send you your country by sending you ...

He was doing this because Osho's commune was spread over 100 acres, it had its own airport, hospital, school, college, and there was no currency in it. It was free. All was free from all politics. Living a happy life .. The number of people was increasingly growing ... by which Ronald Reagan was scared ...

When the Osho followers came to know about this, they sent flowers and sent them to the Jail and in the Rashtrapati Bhavan too. In the prison where Osho was closed, the jailer wrote in his autobiography that I saw for the first time when opposing unconstitutional arrest without violence Or the fierce demonstration happened ..

She has written that she had turned 12 days into my prison church, many flowers, bouquets, pallets were coming from the corner corner of America. Whenever Osho went to the court from the prison, they would present flowers. The whole court complex filled with flowers The judge was surprised ... the entire police personnel were shocked ...

Then the judges said to Osho ... All of us are abnormally amazed, we had called for special forces because your disciples are in lakhs. The demonstration could be furious. But here it is going to be contrary to all expectations. is ?

Then Osho said ... This is my given education, he will perform as he actually will express me, my conduct and my education.

While Osho lived in India, he openly opposed the prevalent practices of Indira, Nehru, Hindu, Muslim, Christian and all other religions. But Indira sent him to jail. Morarji did not send him to jail, nor anyone else. .
Because all knew that this man is so logical and meaningful that it will not come in our political teachings ... nor will we ever resist it because we are baseless!

And eventually the CIA slayed the thallium by killing it poisoned ... started giving away in 1985 and died in 1990 in 5 years.

Because it is better to kill the one you can not answer .... But the disciples did not protest anymore ... singing dancing, drowning in the dance and sending osho ... no cry or no one There was no allegation or no protest, no people died or the city was burnt.

What does a guru want more than that ? 

The disciple is the reflection of the master.

As the disciple will actually be the teacher's given education.

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12 दिन अमेरिका की जेल में थे .. ना कोई आधार ना वारंट ना सबूत .. कुछ नहीं फिर भी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने उन्हें जेल भिजवा दिया..
और कहा कि हम आपको बिना सबूतों के भी अंदर रखेंगे ट्रायल के रूप में और कहेंगे कि आपने देश विदेश से अपने शिष्यों को बिना वीसा के अमेरिका लाकर अमेरिकी कानून का उल्लंघन किया है ..

आपको ये साबित करने में कि आप निर्दोष हो 10 साल लग जायेंगे और तब तक आपका कम्यून आपके बिना नष्ट हो जायेगा या हम उसे तबाह कर देंगे ..और फिर हम आपको बाइज्जत आपके मुल्क भारत भेज देंगे...

वह ऐसा इसलिए कर रहा था क्योंकि ओशो का कम्यून 100 एकड़ से ज्यादा में फैला हुआ था उसमें खुद का airport,  हॉस्पिटल , स्कूल , कॉलेज सब था और वहाँ कोई भी मुद्रा नहीं चलती थी .. निःशुल्क था सब .. सभी राजनीति से हटकर अपना सुखी जीवन जी रहे थे.. लोगों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही थी ... जिससे रोनाल्ड रीगन डर गया...

ओशो के शिष्यों को जब यह पता चला तो उन्होंने फूल भेजे जेल में भी और राष्ट्रपति भवन में भी .. जिस जेल में ओशो बंद थे वहाँ के जेलर ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि मैंने पहली बार देखा जब किसी असंवैधानिक गिरफ्तारी का विरोध बिना हिंसा या उग्र प्रदर्शन के हुआ हो ..

उसने लिखा है कि वो 12 दिन मेरी जेल चर्च में बदल गई थी अमेरिका के कोने कोने से ढेरों फूल, गुलदस्ते , गमले आ रहे थे .. जब भी ओशो जेल से कोर्ट जाते लोग उन्हें फूल भेंट करते .. पूरा न्यायालय परिसर फूलों से भर गया था .... जज हैरान थे , पूरे पुलिस कर्मी हैरान थे ...

तब जजों ने ओशो से कहा ... हम सभी असामान्य रूप से चकित हैं , हमने स्पेशल फोर्सेस बुलवा कर रखी थीं क्योंकि आपके शिष्य लाखों में हैं प्रदर्शन उग्र हो सकता था .. पर यहाँ तो सब उम्मीद के विपरीत हो रहा है यह कैसा विरोध है ?

तब ओशो ने कहा ... यही मेरी दी हुई शिक्षा है , वो जैसा प्रदर्शन करेंगे असल में वह मुझे , मेरे आचरण और मेरी शिक्षा को ही व्यक्त करेंगे !!

ओशो ने भारत में रहते हुए इंदिरा , नेहरू , हिन्दू , मुस्लिम, ईसाई एवं अन्य सभी धर्मों में व्याप्त कुरीतियों का खुलेआम विरोध किया .. पर ना इंदिरा ने उन्हें जेल भेजा ना मोरारजी ने, ना चरण सिंह ना अन्य किसी ने .....
क्योंकि सभी ये बात जानते थे कि ये आदमी इतना तर्कपूर्ण और अर्थपूर्ण है कि ये हमारे राजनैतिक शिकंजों में ना आ सकेगा ... ना हम इसका कभी विरोध कर सकेंगे क्योंकि हम आधारहीन हैं !

और अंततः CIA ने थैलियम नाम का धीमा ज़हर देकर उन्हें मार दिया ... 1985 में देना देना शुरू किया और 5 सालों में 1990 में उनकी मृत्यु हो गई ..

क्योंकि जिसका तुम जवाब नही दे सकते उसे मारना ही बेहतर लगता है .... लेकिन शिष्यों ने तो फिर भी कोई विरोध नही किया ... नाच गाकर, नृत्य में डूबकर ओशो को विदा किया ... कोई रोया नही ना किसी ने किसी पर दोषारोपण किया ना कोई विरोध ना चक्काजाम , ना लोग मरे ना शहर जलाए गए .. 

एक गुरु को इससे अधिक क्या चाहिए.. शिष्य ही गुरु का प्रतिबिंम्ब होते हैं ..

जैसा शिष्य करेंगे दरअसल वही गुरु की दी हुई शिक्षा होगी |


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