Swami Vivekananda in his historic speech in Chicago,

 125 years ago in Swami Vivekananda in his historic speech in Chicago, who said, do we follow it now?

Swamiji had said: -

I'm proud that I am from a religion that has taught the world the patience and tolerance of universal acceptance. We do not believe in universal tolerance only, but we accept all religions of the world as truth ...
I am proud that I am from a country which has sheltered the troubled and persecuted people of all the countries and religions of this earth ......
Communalities, fanatics and its horrific descendants, have been holding the Earth in their scales for a long time. He has filled the earth with violence. How many times has the earth redened with blood? How many civilizations have been destroyed and how many countries have been destroyed. If this was not a terrible monster, then today human society will be more advanced .....
But now their time has been completed. I sincerely hope that the conjunction of today's conference will destroy all the dogmas, every kind of tribulation, whether it is from the sword or the pen and the malice between all humans. 🌸🌹🌸🌹🌸🌹🌸🌹 ... 🌞


🌞🌞125 साल पहले शिकागो में स्वामी विवेकानंद ने अपने ऐतिहासिक भाषण में, जो कहा था, क्या हम उसका अनुसरण वर्तमान में करते हैं ?
स्वामी जी ने कहा था :-
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मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे धर्म से हूं, जिसने दुनिया को सहनशीलता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाया है. हम सिर्फ सार्वभौमिक सहनशीलता में ही विश्वास नहीं रखते, बल्कि हम विश्व के सभी धर्मों को सत्य के रूप में स्वीकार करते हैं.....
मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे देश से हूं, जिसने इस धरती के सभी देशों और धर्मों के परेशान और सताए गए लोगों को शरण दी है......
सांप्रदायिकताएं, कट्टरताएं और इसके भयानक वंशज हठधमिर्ता लंबे समय से पृथ्वी को अपने शिकंजों में जकड़े हुए हैं. इन्होंने पृथ्वी को हिंसा से भर दिया है. कितनी बार ही यह धरती खून से लाल हुई है. कितनी ही सभ्यताओं का विनाश हुआ है और न जाने कितने देश नष्ट हुए हैं. अगर ये भयानक राक्षस नहीं होते तो आज मानव समाज कहीं ज्यादा उन्नत होता.....
लेकिन अब उनका समय पूरा हो चुका है. मुझे पूरी उम्मीद है कि आज इस सम्मेलन का शंखनाद सभी हठधर्मिताओं, हर तरह के क्लेश, चाहे वे तलवार से हों या कलम से और सभी मनुष्यों के बीच की दुर्भावनाओं का विनाश करेगा.

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