Read This Message as often as Possible 🙏यह मैसेज जितनी बार पढे उतना कम ही ह ।🙏

🙏


🙏यह मैसेज जितनी बार पढे उतना कम ही ह ।🙏


एक प्रोफ़ेसर कक्षा में आये और उन्होंने छात्रों से कहा कि वे 
आज जीवन का एक महत्वपूर्ण पाठ पढाने वाले हैं ...

उन्होंने अपने साथ लाई एक काँच की बडी बरनी ( जार ) टेबल पर रखा और उसमें 
टेबल टेनिस की गेंदें डालने लगे और तब तक डालते रहे जब तक कि उसमें एक भी गेंद समाने की जगह नहीं बची ... 
उन्होंने छात्रों से पूछा - क्या बरनी पूरी भर गई ? हाँ ... 
आवाज आई ... 
फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने छोटे - छोटे कंकर उसमें भरने शुरु किये धीरे - धीरे बरनी को हिलाया तो काफ़ी सारे कंकर उसमें जहाँ जगह खाली थी , समा गये , 
फ़िर से प्रोफ़ेसर साहब ने पूछा , क्या अब बरनी भर गई है , छात्रों ने एक बार फ़िर हाँ ... कहा 
अब प्रोफ़ेसर साहब ने रेत की थैली से हौले - हौले उस बरनी में रेत डालना शुरु किया , वह रेत भी उस जार में जहाँ संभव था बैठ गई , अब छात्र अपनी नादानी पर हँसे ... 
फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने पूछा , क्यों अब तो यह बरनी पूरी भर गई ना ? हाँ 
.. अब तो पूरी भर गई है .. सभी ने एक स्वर में कहा .. 

सर ने टेबल के नीचे से 
चाय के दो कप निकालकर उसमें की चाय जार में डाली , चाय भी रेत के बीच स्थित 
थोडी सी जगह में सोख ली गई ... 

प्रोफ़ेसर साहब ने गंभीर आवाज में समझाना शुरु किया 


इस काँच की बरनी को तुम लोग अपना जीवन समझो .... 

टेबल टेनिस की गेंदें सबसे महत्वपूर्ण भाग अर्थात भगवान , परिवार , बच्चे , मित्र , स्वास्थ्य और शौक हैं , 

छोटे कंकर मतलब तुम्हारी नौकरी , कार , बडा़ मकान आदि हैं , और 

रेत का मतलब और भी छोटी - छोटी बेकार सी बातें , मनमुटाव , झगडे़ है .. 

अब यदि तुमने काँच की बरनी में सबसे पहले रेत भरी होती तो टेबल टेनिस की गेंदों और कंकरों के लिये जगह ही नहीं बचती , या 
कंकर भर दिये होते तो गेंदें नहीं भर पाते , रेत जरूर आ सकती थी ... 
ठीक यही बात जीवन पर लागू होती है ... 

यदि तुम छोटी - छोटी बातों के पीछे पडे़ रहोगे 
और अपनी ऊर्जा उसमें नष्ट करोगे तो तुम्हारे पास मुख्य बातों के लिये अधिक समय 
नहीं रहेगा ... 

मन के सुख के लिये क्या जरूरी है ये तुम्हें तय करना है । अपने 
बच्चों के साथ खेलो , बगीचे में पानी डालो , सुबह पत्नी के साथ घूमने निकल जाओ , 
घर के बेकार सामान को बाहर निकाल फ़ेंको , मेडिकल चेक - अप करवाओ ... 
टेबल टेनिस गेंदों की फ़िक्र पहले करो , वही महत्वपूर्ण है ... पहले तय करो कि क्या जरूरी है 
... बाकी सब तो रेत है .. 
छात्र बडे़ ध्यान से सुन रहे थे .. 

अचानक एक ने पूछा , सर लेकिन आपने यह नहीं बताया 
कि " चाय के दो कप " क्या हैं ? 

प्रोफ़ेसर मुस्कुराये , बोले .. मैं सोच ही रहा था कि अभी तक ये सवाल किसी ने क्यों नहीं किया ... 
इसका उत्तर यह है कि , जीवन हमें कितना ही परिपूर्ण और संतुष्ट लगे , लेकिन 
अपने खास मित्र के साथ दो कप चाय पीने की जगह हमेशा होनी चाहिए। 


(अगर अच्छा लगे तो अपने ख़ास मित्रों और निकटजनों को यह विचार तत्काल भेजें.... मैंने तो अभी-अभी यही किया है)

http://www.AnxietyAttak.com



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A professor came to the class and he told the students that they
Today is an important lesson of life ...

They put a glass of big Jar  with them on the table and in it
He started putting the balls of the table tennis and kept till it did not have any place to accommodate one ball ...
They asked the students - did the Jar fill up? Yes ...
The sound was ...
Then, Professor Sahab started filling small buds in it, and gradually shook Barani, so many cactuses were filled in it where the place was empty,
Again, Professor Saheb asked, Is it now full of gratitude, students once again say yes ...
Now Professor Sahab started sanding in the sand pouch with a sand pouch, the sand was sitting in the jar where possible, now the students laughed at their nonsense ...
Then Professor Saheb asked, why now this barn is not full? Yes
.. now it's full. Everyone said in one voice.

Sir from the bottom of the table
Take two cups of tea and put tea in it, tea is also located in the middle of the sand
Was absorbed in a few places ...

Professor Sahab started explaining in grave voice


This glass barni you people consider your life ....

Table Tennis balls are the most important part i.e. God, family, children, friends, health and hobbies,

Small crusher means your job, car, big houses, etc.

The meaning of sand is even more small things, irritation, quarrels.

Now if you were the first sand in the glass barn, then there is no room for table tennis balls and craters.
If the skeleton was filled up, the balls could not be filled, sand could have come ...
The same thing applies to life ...

If you keep going after small things
And if you destroy your energy in it then you have more time for the main things
will not be ...

This is what you need to decide for the happiness of the mind. Ours
Play with the children, pour water into the garden, go out to wander with the wife in the morning,
Take out the waste products of the house, check medical check-up ...
First of all, think about table tennis balls first, that's important ... first decide what is important
... the rest are all sand ..
Students were listening very carefully ..

Suddenly one asked, sir but you did not say this
What are "two cups of tea"?

Professor smiled, said ... I was thinking that no one has asked this question so far ...
The answer is that life should be perfect and satisfied, but
Two cups of tea should always be with drinking a special friend.




If you like it then send this idea to your special friends and close friends .... I just did this now


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एक प्रोफ़ेसर कक्षा में आये और उन्होंने छात्रों से कहा कि वे 
आज जीवन का एक महत्वपूर्ण पाठ पढाने वाले हैं ...

उन्होंने अपने साथ लाई एक काँच की बडी बरनी ( जार ) टेबल पर रखा और उसमें 
टेबल टेनिस की गेंदें डालने लगे और तब तक डालते रहे जब तक कि उसमें एक भी गेंद समाने की जगह नहीं बची ... 
उन्होंने छात्रों से पूछा - क्या बरनी पूरी भर गई ? हाँ ... 
आवाज आई ... 
फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने छोटे - छोटे कंकर उसमें भरने शुरु किये धीरे - धीरे बरनी को हिलाया तो काफ़ी सारे कंकर उसमें जहाँ जगह खाली थी , समा गये , 
फ़िर से प्रोफ़ेसर साहब ने पूछा , क्या अब बरनी भर गई है , छात्रों ने एक बार फ़िर हाँ ... कहा 
अब प्रोफ़ेसर साहब ने रेत की थैली से हौले - हौले उस बरनी में रेत डालना शुरु किया , वह रेत भी उस जार में जहाँ संभव था बैठ गई , अब छात्र अपनी नादानी पर हँसे ... 
फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने पूछा , क्यों अब तो यह बरनी पूरी भर गई ना ? हाँ 
.. अब तो पूरी भर गई है .. सभी ने एक स्वर में कहा .. 

सर ने टेबल के नीचे से 
चाय के दो कप निकालकर उसमें की चाय जार में डाली , चाय भी रेत के बीच स्थित 
थोडी सी जगह में सोख ली गई ... 

प्रोफ़ेसर साहब ने गंभीर आवाज में समझाना शुरु किया 


इस काँच की बरनी को तुम लोग अपना जीवन समझो .... 

टेबल टेनिस की गेंदें सबसे महत्वपूर्ण भाग अर्थात भगवान , परिवार , बच्चे , मित्र , स्वास्थ्य और शौक हैं , 

छोटे कंकर मतलब तुम्हारी नौकरी , कार , बडा़ मकान आदि हैं , और 

रेत का मतलब और भी छोटी - छोटी बेकार सी बातें , मनमुटाव , झगडे़ है .. 

अब यदि तुमने काँच की बरनी में सबसे पहले रेत भरी होती तो टेबल टेनिस की गेंदों और कंकरों के लिये जगह ही नहीं बचती , या 
कंकर भर दिये होते तो गेंदें नहीं भर पाते , रेत जरूर आ सकती थी ... 
ठीक यही बात जीवन पर लागू होती है ... 

यदि तुम छोटी - छोटी बातों के पीछे पडे़ रहोगे 
और अपनी ऊर्जा उसमें नष्ट करोगे तो तुम्हारे पास मुख्य बातों के लिये अधिक समय 
नहीं रहेगा ... 

मन के सुख के लिये क्या जरूरी है ये तुम्हें तय करना है । अपने 
बच्चों के साथ खेलो , बगीचे में पानी डालो , सुबह पत्नी के साथ घूमने निकल जाओ , 
घर के बेकार सामान को बाहर निकाल फ़ेंको , मेडिकल चेक - अप करवाओ ... 
टेबल टेनिस गेंदों की फ़िक्र पहले करो , वही महत्वपूर्ण है ... पहले तय करो कि क्या जरूरी है 
... बाकी सब तो रेत है .. 
छात्र बडे़ ध्यान से सुन रहे थे .. 

अचानक एक ने पूछा , सर लेकिन आपने यह नहीं बताया 
कि " चाय के दो कप " क्या हैं ? 

प्रोफ़ेसर मुस्कुराये , बोले .. मैं सोच ही रहा था कि अभी तक ये सवाल किसी ने क्यों नहीं किया ... 
इसका उत्तर यह है कि , जीवन हमें कितना ही परिपूर्ण और संतुष्ट लगे , लेकिन 
अपने खास मित्र के साथ दो कप चाय पीने की जगह हमेशा होनी चाहिए। 

(अगर अच्छा लगे तो अपने ख़ास मित्रों और निकटजनों को यह विचार तत्काल भेजें.... मैंने तो अभी-अभी यही किया है)

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😊

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